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शुक्रवार, 9 जनवरी 2015

जरूर पढें- 137 पंचायतों ने की शराब दुकानों को बंद कराने की मांग


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137 पंचायतों ने की अपने इलाके से शराब दुकानों को बंद कराने की मांग
पंजाब राज्य इन दिनों नशाखोरी की समस्या से निपटने की कोशिश में जुटा है. इसी क्रम में राज्य के 137 पंचायतों ने राज्य के एक्साइज एंड टैक्सेशन डिपार्टमेंट से मांग की है कि उनके इलाके और आसपास के इलाकों की शराब दुकानों को बंद कराया जाये. विभाग को ऐसे आवेदन लगातार मिल रहे हैं. माना जा रहा है कि अभी और भी कई पंचायत ऐसी मांग कर सकते हैं.
भारत-पाक के हिंदुओं के बीच विवाह की पहल
जहां भारत औऱ पाकिस्तान इन दिनों सीमा पर फायरिंग की वजह से एक दूसरे को तनाव दे और ले रहे हैं. इस बीच मेरठ के गांव वालों ने एक अनूठी पहल की है. वे लोग पाकिस्तान के लड़के और लड़कियों से अपने इलाके के लड़के-लड़कियों की शादी करवा रहे हैं. ताकि दोनों मुल्कों के बीच रिश्ता प्रगाढ़ हो.
फसल के अवशेष न जलाने वाले गांव को एक लाख
पंजाब सरकार ने यह अनूठी घोषणा की है.
आपसी सहमति से गांव ने चुनी महिलाओं की सरकार
सेंधवा जनपद पंचायत की ग्राम पंचायत कामोद में ग्रामीणों ने मिलजुलकर महिलाओं की सरकार चुन ली। गुरूवार को नामांकन के अंतिम दिन ग्रामीणों ने आपसी सहमति से ग्राम के सभी 12 वार्डो में एक-एक महिला पंच और सरपंच के नाम पर सहमति जताते हुए निर्विरोध निर्वाचन करवा दिया। 6 वार्डो में पुरूष सीट होने के बावजूद भी किसी पुरूष अभ्यर्थी ने अपना नामांकन नहीं भरा, बल्कि महिलाओं को आगे कर दिया। संभवत: ग्राम पंचायत कामोद (ध) जिले की पहली शत-प्रतिशत महिला जनप्रतिनिधि वाली पंचायत बन गई।
2017 तक झारखंड के सभी गांव होंगे स्वच्छ
पेयजल और स्वच्छता मंत्री चंद्रप्रकाश चौधरी ने गुरुवार को मंत्री पद का कार्यभार संभाल लिया. नेपाल हाउस सचिवालय में उन्होंने कार्यभार संभालने के बाद विभागीय अधिकारियों और आपदा प्रबंधन विभाग के सचिव के साथ अनौपचारिक बातचीत भी की. पत्रकारों से बातचीत करते हुए श्री चौधरी ने कहा कि 2017 तक झारखंड के सभी गांवों को स्वच्छ बना दिया जायेगा.

बुधवार, 7 जनवरी 2015

जरूर पढ़ें- आदर्श ग्राम के लिए 20 जरूरी इंडिकेटर


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स्मार्ट विलेज के लिए 20 अनिवार्य इंडिकेटर
आंध्र प्रदेश सरकार ने स्मार्ट आंध्र प्रदेश कार्यक्रम के तहत स्मार्ट विलेज बनवाने के लिए 20 इंडिकेटर तय किये हैं. ये इंडिकेटर क्या हैं जानने के लिए पढ़ें खबर...
एक आदर्श ग्राम ही पर्याप्त नहीं
मनरेगा एक्टिविस्ट निखिल डे बता रहे हैं कि कैसे सांसदों के लिए एक आदर्श ग्राम प्रति वर्ष बनाने की योजना पर्याप्त नहीं.
इस गांव में ड्रग्स पर है पूर्ण प्रतिबंध
पढिये मोंगा के इस गांव की कहानी जहां ड्रग्स की वजह से 35 युवाओं की मौत हो गयी. फिर गांव वालों ने ड्रग्स उन्मूलन के लिए सख्त कदम उठा लिया.
आइसीआइसीआइ बैंक औऱ डिजिटल विलेज
आइसीआइसीआइ बैंक चाहती है कि उसके डिजिटल विलेज कांसेप्ट को दूसरे लोग भी अपनायें और दूसरी जगह भी डिजिटल विलेज तैयार किये जायें...

मंगलवार, 6 जनवरी 2015

जरूर पढ़ें- 2


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इस गांव में किसी घर में नहीं है सामने का दरवाजा
महाराष्ट्र में एक ऐसा गांव है जहां किसी घर में सामने का दरवाजा नहीं है. यहां तक कि गांव के एक बैंक में भी सामने का दरवाजा नहीं है. लोग पीछे के दरवाजे से काम चलाते हैं. पढिये एनडीटीवी की रिपोर्ट.
क्यों मिट रहे हैं चीन के गांव
चीन में शहरी आबादी तेजी से बढ़ रही है. हालात ये हैं कि अब इस देश में आधी से अधिक आबादी शहरों में रहती है. मगर इस बीच लोग गांवों के मिटने से परेशान हैं. एक फिल्मकार ने फिल्म बनाकर लोगों को बताया है कि कैसे इन मरते गांवों को अब भी बचाया जा सकता है. पढ़ें रिपोर्ट. साथ में फिल्म भी देखें...
एक गांव जहां नहीं होता सरपंच चुनाव
मंदसौर: मध्य प्रदेश इन दिनों पंचायत चुनाव के रंग में रंगा हुआ है, लेकिन मंदसौर जिले में ढाबला महेश एक ऐसा गांव है जहां के लोग चुनाव में मतदान की बजाय आपसी सहमति में भरोसा करते हैं. उन्होंने इस बार आपसी सहमति से दूल्हे सिंह को सरपंच चुना है.
इस जिले के सौ गांव 24 घंटे बिजली से होंगे रोशन
मध्यप्रदेश के सीहोर जिले के सौ गांव बिजली से 24 घंटे रोशन होंगे। इन गांवों में बिजली गुल होने तथा वोल्टेज की समस्या नहीं रहेगी। दीनदयाल ग्राम ज्योति योजना से इन गांवों के दिन बदलने वाले हैं। इन गांवों में शहरों की तरह निर्वाध रूप से बिजली मिलेगी। इस योजना के बाद बिजली के लिए परेशान गांव के लोगों को बिजली के लिए परेशान नहीं होना पड़ेगा। ग्रामीण क्षेत्रों मे बिजली के गुल होने की समस्या हमेशा बनी रहती है।

जरूर पढ़ें- 1


पशुपालन है भूमिहीन परिवारों की जीविका का मुख्य आधार- एनएसएसओ की रिपोर्ट
गंवई इलाकों में सबसे गरीब लोगों के लिए पशुपालन अब भी जीविका का मुख्य स्रोत बना हुआ है। एनएसएसओ की 17 वीं दौर की गणना पर आधारित एक रिपोर्ट के अनुसार जिन खेतिहर परिवारों के पास 0.01 हैक्टेयर या इससे कम रकबे की जमीन है उनमें तकरीबन 20 प्रतिशत परिवार जीविका के लिए मुख्य रुप से पशुपालन पर निर्भर हैं। गौरतलब है कि ऐसे परिवारों में भूमिहीन परिवार भी शामिल हैं।
मखाना की खेती कर रही महिलाएँ
मखाना उत्पादन पूरी तरह से मछुआरा समुदाय की महिलाओं के हाथों में है। पुरुष इस पूरी प्रक्रिया में बस सहयोग करते हैं। उनका काम केवल तालाब से मखाने के तैयार बीजों को तोड़ना होता है। दरअसल मखाने की पत्तियों, तनों और जड़ों में हजारों नुकीले काँटे होते हैं। ये काँटे बीज तोड़ते वक्त बहुत तेज चुभते हैं। बीज तोड़ने में पूरा हाथ जख्मी हो जाता है। इस काम मे पुरुषों का सहयोग केवल यही तक रहता है। इन बीजों को तोड़ने में तकलीफ ना हो, इसके लिए तकनीक सुविधा लेने का विचार हो रहा है। मिथिलांचल में पान और तालाब के बाद अगर कोई पहचान है तो वह है ‘मखाना’। मखाना मिनरल और न्यूट्रियंस से भरपूर होता है। इसके सेवन से कई फायदे मिलते हैं। मिथिला में पैदा होने वाला मखाना एक और लाभ पहुँचा रहा है। वह लाभ है महिलाओं को सशक्त करने का। मछुआरा समुदाय से ताल्लुक रखने वाली महिलाएँ मखाना का उत्पादन कर आधी आबादी की मेहनत, लगन का उदाहरण पेश कर रही हैं।
फ्लोरोसिस प्रभावित बस्तियों में 2017 तक सुरक्षित पेयजल
फ्लोराइड से ग्रस्त ग्रामीण व बच्चे नई दिल्ली (भाषा)। देश की 14,131 बस्तियों के फ्लोरोसिस से प्रभावित होने का जिक्र करते हुए सरकार ने शुक्रवार को कहा कि साल 2017 तक ऐसी बस्तियों में सुरक्षित पेयजल सुविधा उपलब्ध करा दी जाएगी।